इस संसार की गतिविधियों पर नहीं अधिकार किसी का है लिरिक्स

Bhajan Diary

इस संसार की गतिविधियों पर,
नहीं अधिकार किसी का है,
जिसको हम परमात्मा कहते,
ये सब खेल उसी का है।।
राम सिया राम सिया राम सिया राम,
राम सिया राम सिया राम सिया राम।



छणभर को भी नहीं छोड़ता,

सदा हमारे साथ में है,
काया की श्वासा डोरी का,
तार उसी के हाथ में है,
हंसना रोना जीना मरना,
सब उसकी मर्जी का है,
जिसको हम परमात्मा कहते,
ये सब खेल उसी का है।।



निर्धन धनी धनी हो निर्धन,

ग्यानी मूढ मूरख ग्यानी,
सब कुछ अदल बदल देने में,
कोई नहीं उसका सानी,
समझदार भी समझ सके ना,
ऐसा अजब तरीका है,
जिसको हम परमात्मा कहते,
ये सब खेल उसी का है।।



मिट्टी काली पीली हरे बन,

आसमान का रंग नीला,
सूर्य सुनहरा चन्द्रमा शीतल,
सब कुछ उसकी ही लीला,
सबके भीतर स्वयं छिप गया,
सृजनहार सृष्टि का है,
जिसको हम परमात्मा कहते,
ये सब खेल उसी का है।।



‘राजेश्वर आनंद’ अगर सुख,

चाहो तो मानो शिक्षा,
तज अभिमान मिला दो उसकी,
इच्छा में अपनी इच्छा,
यही भक्ति का भाव है प्यारे,
सूत्र यही मुक्ती का है,
जिसको हम परमात्मा कहते,
ये सब खेल उसी का है।।



इस संसार की गतिविधियों पर,

नहीं अधिकार किसी का है,
जिसको हम परमात्मा कहते,
ये सब खेल उसी का है।।
राम सिया राम सिया राम सिया राम,
राम सिया राम सिया राम सिया राम।

स्वर – पूज्य श्री राजेश्वरानंन्द जी।
प्रेषक – देवेश शर्मा।


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